हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले की ऊँची पहाड़ियों में स्थित पराशर झील मंदिर एक ऐसा स्थल है, जहाँ प्रकृति, रहस्य और आस्था एक साथ देखने को मिलती है। यह झील और इसके किनारे बना प्राचीन मंदिर सदियों से लोगों को आकर्षित करता रहा है।
स्थान और प्राकृतिक सुंदरता
पराशर झील लगभग 2700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और चारों ओर से बर्फ से ढकी पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरी हुई है। यहां का शांत वातावरण इसे एक धार्मिक स्थल के साथ-साथ एक बेहतरीन पर्यटन स्थल भी बनाता है।
इस झील का संबंध ऋषि पराशर से माना जाता है और कहा जाता है कि उन्होंने इसी स्थान पर तपस्या की थी और उनकी शक्ति से ही इस झील का निर्माण हुआ।
पराशर झील की सबसे अनोखी बात इसका तैरता हुआ द्वीप है, जो कि घास का एक छोटा सा हिस्सा है जो झील के भीतर इधर-उधर घूमता रहता है।
मौसम के अनुसार इसकी स्थिति बदलती रहती है। वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक घटना बताते हैं और श्रद्धालु इसे ऋषि की शक्ति का चमत्कार मानते हैं।
झील के किनारे बना मंदिर हिमाचली शैली की अद्भुत लकड़ी की कारीगरी का उदाहरण है। यह मंदिर पगोडा शैली में बना हुआ है, जो अन्य मंदिरों से अलग बनाता है।
गर्मी के मौसम में हर साल यहां मेला आयोजित होता है जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लोक संगीत और पारंपरिक हिमाचली व्यंजन परोसे जाते हैं। यह मंदिर धौलाधार पर्वतमाला के मनमोहक दृश्यों से भरा हुआ है। बग्गी गांव से मंदिर और झील तक सात से आठ किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करके आप प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकते हैं।
