Gangotri temple Uttarakhand

गंगोत्री मंदिर: जहाँ धरती पर अवतरित हुई माँ गंगा की दिव्य धारा

भारत की पवित्र नदियों में गंगा का स्थान सबसे ऊँचा माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और चारधाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंदिर का धार्मिक महत्त्व हिंदू धर्म में गंगा नदी को केवल एक नदी नहीं बल्कि देवी का स्वरूप माना…

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समृद्ध हिमाचल 2045 scheme

समृद्ध हिमाचल 2045: आत्म निर्भर राज्य की ओर कदम 

समृद्ध हिमाचल योजना हिमाचल प्रदेश सरकार की एक दीर्घकालीक विकास दृष्टि है, जिसका उद्देश्य राज्य को वर्ष 2045 तक आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। यह कोई एक ही लाभ देने वाली छोटी योजना नहीं है बल्कि कई क्षेत्रों जैसे शिक्षा, रोजगार, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य और पर्यावरण को जोड़कर राज्य के समग्र विकास का रोडमैप तैयार करती है। योजना के प्रमुख लक्ष्य  यह योजना 7 प्रमुख…

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नारायण की तपोभूमि बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड

नारायण की तपोभूमि जहाँ अलकनंदा के तट पर खुलते हैं मोक्ष के द्वार: बद्रीनाथ

बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली ज़िले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय मंदिर है। यह चारधाम यात्रा का मुख्य केंद्र और वैष्णव भक्तों का सबसे महत्वपूर्ण आस्था स्थल माना जाता है। बद्रीनाथ नाम की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु यहाँ तपस्या में लीन थे। तपस्या करते…

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नरेश्वर मंदिर समूह का इतिहास

जहाँ बारिश ख़ुद करती है शिवलिंग का अभिषेक – जललोक से शिवधाम तक नरेश्वर मंदिर समूह का इतिहास।

नरेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर से लगभग 35-40 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर प्राचीन भारत की अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा उदाहरण है। इतिहासकारों के अनुसार इनका निर्माण लगभग 8वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य में हुआ। उस समय यह क्षेत्र शिव उपासना और योग साधना का एक प्रमुख केंद्र था।…

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भीम का चूल्हा - हाटू पीक

ज़ब पांडव पहुचें हिमालय की चोटी पर- हाटू पीक की पौराणिक कथा

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के पास हाटू पीक लगभग 11,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। हाटू माता हिमाचल की स्थानीय लोकदेवी हैं। इन्हें सामान्यतः माँ काली या भीमकाली का रूप माना जाता है। राजधानी शिमला से क़रीब 61 किलोमीटर दूर स्थित है नारकंडा अपनी ख़ूबसूरत वादियों के लिए विख्यात है। यहाँ से केवल…

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शिव आदियोगी का रहस्य

जब आदियोगी ने खोला योग का रहस्य: जानिए कौन थे उनके प्रथम शिष्य और योग के प्रथम प्रचारक, सप्त ऋषियों की अद्भुत यात्रा।

आदियोगी शिव और सप्त ऋषि का संबंध सनातन धर्म की योग-परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह संबंध योग के आदि सत्रोत और उसके प्रथम प्रसार से जुड़ा हुआ है। आदियोगी शिव कोन हैं? सनातन परंपरा के अनुसार भगवान शिव को आदियोगी कहा जाता है, अर्थात् योग के प्रथम गुरु। योग की संपूर्ण परंपरा-आसन,…

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माँ बगलामुखी। कांगड़ा

दशमहाविद्या की सबसे रहस्यमयी देवी: शत्रु विनाश और वाणी सिद्धि प्रदान करने वाली माँ बगलामुखी।

माता बगलामुखी हिंदू धर्म की दशमहाविद्याओं में से एक अत्यंत शक्तिशाली देवी मानी जाती हैं। उन्हें विशेष रूप से शत्रुओं का नाश करने वाली, वाणी पर नियंत्रण देने वाली और न्याय पर विजय दिलाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। माँ की साधना तंत्र और शक्ति उपासना में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है।…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में दिया आश्वासन।- पाश्चिम एशिया युद्ध

पाश्चिम एशिया युद्ध से वैश्विक तेल संकट गहराया, लेकिन भारत सुरक्षित- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में दिया आश्वासन।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद और देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बाबजूद भारत में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर घबराने की ज़रूरत नहीं है। सरकार ने पर्याप्त भंडारण और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह युद्ध…

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दिव्य शक्तिपीठ माता ज्वाला

ऐसा अद्भुत मंदिर जहाँ मूर्ति नहीं, बल्कि स्वयं प्रकट ज्योति के रूप में होती है माँ की पूजा- ऐसा दरबार जहाँ झुके सम्राट अकबर भी, जानिए दिव्य शक्तिपीठ माता ज्वाला का रहस्य।

भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माता ज्वाला जी का मंदिर अपनी अनोखी चमत्कारी विशेषता के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यह ऐसा दिव्य मंदिर है जहाँ मूर्ति नहीं, बल्कि धरती से प्रकट होने वाली नौ ज्योतिओं के रूप में माता की पूजा की जाती है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के ज्वालामुखी…

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una wood cut - ऊना वन माफिया

एक हज़ार ख़ैर के पेड़ों का क़त्ल: ऊना के जंगलों पर ‘वन माफिया’ का हमला, हाईकोर्ट तक पहुँचा मामला पर्यावरण, राजस्व और विश्वास तीनों पर संकट।

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में खैर यानी खदिर के पेड़ों की अवैध कटाई ने एक बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण के लिए और वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करदिए हैं। वानस्पतिक नाम अकेशिया कैटेचू  को हिंदी में खैर, खदिर या कत्था के नाम से जाना जाता है। उपयोग: यह एक औषधीय पौधा…

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