जागेश्वर धाम उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। समुंद्र तल से लगभग 1870 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह धाम जटा गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है। माना जाता है कि यहां स्थित मंदिर समूह लगभग 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी और चंद राजाओं द्वारा निर्मित किया गया।
जागेश्वर धाम का पौराणिक महत्व
जागेश्वर धाम का संबंध भगवान शिव से जुड़ी अनेक कथाओं से है। मान्यता है कि यह स्थान भगवान शिव की तपोभूमि रहा है।
एक मान्यता के अनुसार प्राचीन समय में सप्तऋषियों और अनेक साधु-संतों ने यहाँ कठोर तपस्या की थी। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव स्वयं यहाँ योगेश्वर रूप में विराजमान हुए, जो आगे चलकर जागेश्वर कहलाया।
मंदिर समूह और वास्तुकला
जागेश्वर धाम अपने अद्भुत मंदिर समूह और प्राचीन मंदिर की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यहां लगभग 124 मंदिर स्थित हैं जिनमे प्रमुख मंदिर हैं- जागेश्वर महादेव, मृत्युंजय मंदिर, दण्डेश्वर मंदिर और कुबेर मंदिर।
मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया गया है।
धार्मिक उत्सव और मेले
जागेश्वर धाम में श्रावण मास और महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। श्रावणी मेले के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से भर जाता है। यहाँ प्राप्त अनेक मूर्तियाँ और शिखालेख प्राचीन भारतीय संस्कृति और कला के महत्वपूर्ण धरोहर माने जाते हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह स्थान प्राचीन समय में शैव धर्म का प्रमुख केन्द्र था। यहाँ स्थित मंदिरों की वास्तुकला में गुप्त और मध्यकालीन कला शैली का सुंदर मिश्रण दिखाई देता है। यही कारण है कि इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि रखने वाले लोग भी बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं।
