हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ब्रजेश्वरी देवी मंदिर भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं के कारण भी प्रसिद्ध है।
ब्रजेश्वरी नाम संस्कृत शब्द वज्र से आया है जिसका अर्थ है वज्र और ईश्वरी जिसका अर्थ है देवी। इन्हें माता दुर्गा का रूप माना जाता है, जिन्होंने राक्षस कालीकला का वध करने के लिए दिव्य वज्र का प्रयोग किया था। शक्ति पीठ कथा के अनुसार यहाँ माता सती का बायाँ स्तन गिरा था, जिससे यह शक्ति पीठ बन गया।
यह मंदिर प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है और शक्ति की उपासना का केंद्र रहा है। मान्यता है कि यहां माता सती के शरीर का एक अंग गिरा था, जिससे यह स्थान शक्ति पीठ बन गया।
महाभारत से जुड़ी मान्यता
स्थानीय कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहाँ आकर पूजा की थी। माना जाता है कि महाभारत युद्ध में घायल सैनिकों के घावों पर मक्खन लगाया जाता था उसी परंपरा को आज भी निभाया जाता है। मंदिर की दीवारों पर मक्खन लगाया जाता है।
हर मकर संक्रांति पर मक्खन चढ़ाने की परंपरा है, यह परंपरा पूरे भारत में अनोखी मानी जाती है।
हर साल यहाँ हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, माना जाता है कि माता ब्रजेश्वरी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं, संकटों को दूर करती हैं और जीवन में शक्ति और साहस प्रदान करती है।
मकर संक्रांति के समय यहाँ विशेष उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान मंदिर को सजाया जाता है और भव्य आयोजन किए जाते हैं। माता ब्रजेश्वरी देवी मंदिर को नगरकोट की देवी के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस मंदिर को नगरकोट धाम भी कहा जाता है।
ब्रजेश्वरी मंदिर को कांगड़ा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और यहां कि अनोखी मक्खन परंपरा और ऐतिहासिक महत्व इसे विशेष बनाते हैं।
