महर्षि महेश योगी द बीटल्स

जब “द बीटल्स” पहुँचे भारत: जाने कैसे महर्षि महेश योगी ने पश्चिम को ध्यान सिखाया।

महर्षि महेश योगी 20वीं सदी के एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने पूरे विश्व में ट्रांससेंडेंटल मेडिटेशन का प्रचार- प्रसार किया। उन्होंने भारतीय ध्यान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करके लाखों लोगों को ध्यान की और प्रेरित किया।

प्रारंभिक जीवन

महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1918 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उनका मूल नाम महेश प्रसाद वर्मा था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के बाद सन् 1942 में अलाहबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक किया। बाद में वे महान संत स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती (ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य) के शिष्य बने और लगभग 13 वर्षों तक उनके साथ रहकर शिक्षा प्राप्त की।

साधारण बालक से विश्वगुरु बनने की यात्रा

गुरुदेव ने ट्रांससेंडेंटल मेडिटेशन की तकनीक को जन जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

यह ध्यान पद्धति:

सरल और सहज है

प्रतिदिन 15-30 मिनट में की जा सकती है।

मानसिक शक्ति, एकाग्रता और मानसिक तनाव मुक्ति में सहायक मानी जाती है।

गुरुदेव ने 1955  में ही भारत से बाहर जा कर इस ध्यान की विधि का प्रचार प्रारंभ कर दिया। उन्होंने पहले श्रीलंका और फिर दक्षिण- पूर्व एशिया, यूरोप तथा अमेरिका में ध्यान का संदेश पहुँचाया। उनका संदेश- “प्रत्येक व्यक्ति के भीतर शांति जगाकर विश्व शांति स्थापित करना।” उनका ध्यान-पद्धति सरल, वैज्ञानिक और सभी के लिए उपयोगी साबित हुआ। धीरे-धीरे पश्चिमी सभ्यता के देशों को भारतीय ध्यान परंपरा आकर्षित करने लगी।

1968: ज़ब द बीटल्स पहुँचे ऋषिकेश

महर्षि महेश योगी ने आंदोलन को विश्वभर में असाधारण सफलता और पहचान तब मिली जब प्रसिद्ध संगीत समूह द बीटल्स भारत के ऋषिकेश में स्थित उनके आश्रम चौरासी कुटिया आए। बीटल्स के सदस्य वहाँ ध्यान करते, प्रकृति के बीच समय बिताते, आत्मचिंतन करते। इसी दौरान उन्होंने अपने कई प्रसिद्ध गानों की रचना भी की।

संस्थाएं और योगदान

महर्षि अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय

महर्षि विद्यामंदिर विद्यालय

ट्रांससेंडेंटल मेडिटेशन मूवमेंट

5 फ़रवरी 2008 को गुरुदेव का निधन व्लोड्रॉप, नीदरलैंड में हुआ। लेकिन उनकी दी हुई शिक्षा आज भी विश्वभर में लाखों लोगों के जीवन को दिशा दे रही है।

1955 में शुरू हुई ये यात्रा 1968 में द बीटल्स के साथ विश्व भर में प्रसिद्ध हुई और आज भी मानवता को शांति की ओर ले जा रही है।

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