हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में खैर यानी खदिर के पेड़ों की अवैध कटाई ने एक बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण के लिए और वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करदिए हैं।
वानस्पतिक नाम अकेशिया कैटेचू को हिंदी में खैर, खदिर या कत्था के नाम से जाना जाता है।
उपयोग: यह एक औषधीय पौधा है जिससे आयुर्वेद में त्वचा और गले की समस्याओं के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस पेड की लकड़ी से कत्था बनाया जाता है जो कि पान में इस्तेमाल किया जाता है।
मार्च 2026 में ऊना के झांबर पंचायत क्षेत्र में कुछ ही दिनों के भीतर लगभग 1,000 खैर के पेड़ रातों रात काट दिए गए। इस क्षेत्र के अलावा टकराला, लडोली, अम्बोटा, अम्ब टिल्ला और कुठेडा खैरला जैसे इलाक़ों में भी बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की घटनाएं सामने आई हैं।
इस गंभीर मामले को देखते हुए हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भी मामले की जाँच करते हुए चिंता व्यक्त की और इसे “प्रणालीगत चूक” करार देते हुए निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी खैर के पेड़ों की जीपीएस आधारित मैपिंग कर उनकी गिनती सुनिश्चित की जाएगी। यह आदेश वन संरक्षण व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
एक दस वर्षीय योजना के अंतर्गत परिपक्क खैर को काटने की वैध अनुमति थी लेकिन वर्तमान में आई घटनाएं पूरी तरह अवैध और अनियंत्रित कटाई की ओर इशारा कर रही हैं, जो कि वन संरक्षण कानूनों की अवहेलना है।
खैर के पेड़ों की कटाई से जैव विविधता, मिट्टी की गुणवत्ता, उर्वरता और जल संरक्षण प्रणाली भी प्रभावित होगी। आर्थिक दृष्टि से भी यह घटना राज्य के लिए भारी नुक़सान का कारण बनी है। करोड़ों रुपये की वन संपदा को अवैध रूप से नष्ट होने से राज्य के राजस्व पर सीधा प्रभाव पड़ा है। स्थानीय लोगों का यह मानना है की इतनी बड़ी संख्या पर पेड़ों की कटाई बिना किसी संगठित नेटवर्क के संभव नहीं है।
