हिमाचल प्रदेश में इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र बने हैं- “ग्रांट” (अनुदान) से जुड़े हुए मुद्दे। इनमें से सबसे प्रमुख हैं- हाल ही में हुआ अनुपूरक बजट का विवाद, केंद्र सरकार से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान का बंद होना, मंदिर निधियों के उपयोग का विवाद, छात्रवृत्ति अनुदान घोटाला। ये सभी मुद्दे राज्य की राजनीतिक माहौल और आर्थिक स्थिति को सीधा प्रभावित कर रहे हैं।
₹40,461.95 करोड़ का अनुपूरक बजट और विपक्ष का विरोध
मार्च 2026 में राज्य सरकार ने ₹40,461.95 करोड़ का अनुपूरक बजट विधान सभा में पारित किया, जिसको लेकर वित्तीय स्थिति को लेकर नई बहस छिड़ गई।
विपक्ष का विरोध: भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया है की सरकार ने चल रहे सत्र के दौरान पूरक बजट की हार्ड कॉपी सदन में प्रस्तुत नहीं की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सदन में बजट दस्तावेजों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
राजस्व घाटा अनुदान पर बड़ा विवाद:
राजस्व घाटा अनुदान स्वतंत्रता के बाद से ही आय का एक प्रमुख स्रोत रहा है और यह राज्य की कुल आय का लगभग 25% हिस्सा प्रदान करता रहा है। इसके बंद होने से राज्य को हर साल लगभग ₹7-8 करोड़ का नुक़सान उठाना पड़ सकता है। प्रतिपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के वित्तीय अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन के दावे सही नहीं हैं।
विपक्ष यानी भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और अनावश्यक खर्च का आरोप लगाते हुए कहा कि यह संकट सरकार की ग़लत नीतियों का नतीजा है।
