हिमाचल प्रदेश के चैल के पास स्थित एक अत्यंत सुंदर और आध्यात्मिक स्थल है, जहाँ काली माता का प्राचीन मंदिर ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है। यहाँ पहुँचते ही मन अपने आप शांत हो जाता है। कहते हैं, कुछ स्थान ऐसे होते हैं जहाँ जाने का निर्णय हम लेते हैं, लेकिन बुलावा ऊपर से ही आता है- काली दा टिब्बा भी उन्ही पवित्र स्थानों में से एक है।
काली दा टिब्बा की विशेषताएँ
यह मंदिर समुंद्र तल से लगभग 7,500 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित है।
यहाँ से चूड़धार पर्वत श्रृंखला और आस पास की घाटियों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य यहाँ बेहद मनमोहक होता है।
मंदिर का वातावरण बहुत शांत और ध्यान के लिए उपयुक्त माना जाता है। यहाँ खड़े होकर जब आप नीचे फैली पहाड़ियाँ और चमकदार बर्फ से ढके चूड़धार पर्वत शृंखला को देखते हैं तो ऐसा लगता है जैसे प्राकृति स्वयं ध्यान में लीन हो। सूर्योदय के समय जब पहली किरणे मंदिर के शिखर को स्पर्श करती हैं, तो वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा की अनुभूति होती है। जब शाम को सूर्य धीरे-धीरे पहाड़ों के पीछे छिपता है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे माँ काली स्वयं आकाश में दीप प्रज्वलित कर रही हों।
धार्मिक महत्व
यहाँ माता काली की पूजा होती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान मनोकामना पूर्ण करने वाला माना जाता है।
भक्त यहाँ आकर शांति और सकारात्मक ऊर्जा अनुभव करते हैं।
घूमने का सही समय
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर सबसे अच्छा समय है, सर्दियों में यहाँ हल्की बर्फबारी भी देखने को मिल सकती है। सोलन से चैल लगभग 40-45 किमी की दूरी पर है और चैल से काली का टिब्बा लगभग 6-7 किमी आगे पहाड़ी सड़क से है यहाँ आप गाड़ी से जा सकते हैं। अगर आपको ट्रैकिंग पसंद है तो चैल से लगभग 7 किमी का सीनिक फारेस्ट ट्रेक करके भी आप पहुँच सकते हैं।
