हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश राज्य के चंबा जिले के भरमौर में स्थित एक प्राचीन मंदिर की जिसे हम यमराज मंदिर के नाम से जानते हैं। यह मंदिर रहस्य से भरा हुआ एक अनोखा मंदिर है। यह भारत का एक ऐसा मंदिर है जिसमें लोग कदम रखने से भी डरते हैं। इसे यमराज का इकलौता मंदिर माना जाता है मान्यताओं के अनुसार मृत्यु होने के बाद आत्माओं का न्याय इसी मंदिर में होता है। यमराज का यह अनोखा मंदिर एक घर की तरह दिखता है। इस मंदिर को लेकर मानता है कि यहीं पर यमराज व्यक्ति के कर्मों का फैसला करते हैं। इस मंदिर में यमराज और चित्रगुप्त के अलग-अलग कमरे बने हुए हैं। इस मंदिर में यमराज की कचहरी लगती है और यहां पर व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से उसे स्वर्ग या नरक भेजा जाता है।
इस मंदिर की मान्यता है कि जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो यमराज के दूत सबसे पहले उसकी आत्मा को पड़कर इसी मंदिर के अंदर लेकर आते हैं और चित्रगुप्त के सामने प्रस्तुत करते हैं इसके बाद चित्रगुप्त उस आत्मा के कर्मों को देखकर उसे सामने वाले कमरे जिसमें की यमराज विराजमान है उसमें पेश करते हैं यहां व्यक्ति के कर्मों के अनुसार यमराज अपना फैसला सुनाते हैं। यह मंदिर लगभग 1400 साल पुराना मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में 4 अदृश्य द्वार है जो सोना, चांदी, तांबा और लोहा के हैं यमराज के निर्णय के बाद यमदूत इन्हीं अदृश्य द्वारों से आत्मा को स्वर्ग या नरक में लेकर जाते हैं। गरुड़ पुराण में भी यमराज के इन चार द्वारों का उल्लेख मिलता है। मंदिर की सबसे अजीब बात यह है कि यह मंदिर शिव की नगरी में स्थित है परंतु फिर भी यहां मृत्यु से पहले पहुंचना कुछ अनहोनी का संकेत माना जाता है लोग कहते हैं इस मंदिर के पास से गुजरने से आत्मा कांप उठती है।