बिना छत्त का मंदिर फिर भी अटूट आस्था :
मंडी जिला में स्थित, जंजैहली से 16 किलोमीटर दूर शिकारी देवी मंदिर ऐसा अनोखा मंदिर है जहाँ ऋषि मार्कंड्ये ने वर्षों तक तपस्या की और दुर्गा माँ ने प्रसन्न होकर शक्ति रूप में यहाँ स्थापित हुई। इस मंदिर में 64 योगिनिया विराजमान है, इसलिए माता को जोगिनी माता भी कहा जाता है। यहाँ माता की नवदुर्गा मूर्ति, चामुंडा, गणेश जी की मूर्ति भी स्थापित है।
इस मंदिर की ख़ास बात यह है की यहाँ माता का दरबार खुले आसमान के नीचे है। भारी बारिश और बर्फबारी के बावज़ूद भी मूर्तियो का सुरक्षित रहना किसी चमत्कार से कम नही है। यह मंदिर ऐसा पवित्र स्थल है, जहाँ आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम है यह तो एक रहस्य है की इतनी बर्फ़वारी होने के बावजूद भी इस मंदिर में बर्फ नही ठहरती है।
पौराणिक मान्यता: धार्मिक मान्यता के अनुसार पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस स्थान पर शक्ति के रूप में माता शिकारी देवी की तपस्या की थी। प्रसन्न होकर उन्होंने पांडवों को महाभारत के युद्ध में कौरवों के विरुद्ध विजय का आशीर्वाद दिया था।
पांडवों ने यहाँ माता की मूर्ति कि स्थापना की, लेकिन मंदिर का निर्माण पूरा नहीं कर पाए। आज भी यह मंदिर बिना छत के खुले आसमान के नीचे है। माना जाता है कि माता का आदेश पांडवों को मंदिर का निर्माण केवल एक दिन और एक रात में करने को दिया गया था जिसे वे पूरा ना कर पाए इसलिए मंदिर बिना छत के अधूरी रह गईं।
नवरात्रों के समय यहाँ विशेष धार्मिक कार्यक्रम और मेले आयोजित किए जाते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते है तथा यहाँ की सांस्कृतिक परंपरा को देखते हैं।
गर्मियों में यह स्थान घूमने के लिए और ट्रैकिंग के लिए एक आदर्श स्थान बन जाता है जो की आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम है।
