हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के पास हाटू पीक लगभग 11,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। हाटू माता हिमाचल की स्थानीय लोकदेवी हैं। इन्हें सामान्यतः माँ काली या भीमकाली का रूप माना जाता है। राजधानी शिमला से क़रीब 61 किलोमीटर दूर स्थित है नारकंडा अपनी ख़ूबसूरत वादियों के लिए विख्यात है। यहाँ से केवल सात किलोमीटर दूर पहाड़ की चोटी पर माँ हाटू का मंदिर है। सुंदर लकड़ियों से बना यह मंदिर धार्मिक मान्यताओं से भी भरपूर है। माता विशेष रूप से शिमला के नारकंडा क्षेत्र की रक्षक देवी के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजी जाती हैं। नारकंडा क्षेत्र की ऊँचाइयों पर स्थित हाटू पीक केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र नहीं, बल्कि गहरी आस्था और रहस्यमयी लोककथायों का पवित्र स्थान भी है। नवरात्रि में यहाँ पर विशेष रूप से पूजा की जाती है और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।
पांडवों की साधना और “भीम का चूल्हा”
महाभारत काल में जब पांडव अज्ञातवास के दौरान हिमालय की ओर आए, तब वे इस पवित्र चोटी तक पहुँचे। यहाँ की शांति और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें साधना के लिए प्रेरित किया। मान्यता है कि पांडवों ने यहाँ माता हाटू की आराधना की और कुछ समय तक उन्होंने यहीं निवास किया।
स्थानीय लोग आज भी एक विशाल पत्थर को “भीम का चूल्हा कहते हैं। विश्वास किया जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ भीम ने भोजन बनाने के लिए पत्थरों से चूल्हा तैयार किया था।
क्यों मानी जाती हैं माँ हाटू क्षेत्र की रक्षक
नारकंडा और आसपास के गाँव के लोग मानते हैं कि माँ हाटू:
यात्रियों की सुरक्षा करती है।
प्राकृतिक आपदाओं से क्षेत्र को सुरक्षित करती हैं।
कृषि और पशुधन की समृद्धि देती है और परिवारों में सुख-शांति बनाए रखती है।
हर वर्ष ज्येष्ठ महीने के प्रथम रविवार को हाटू माता का प्रसिद्ध वार्षिक मेला बड़ी श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है इस दिन माता के दर्शन करना बेहद शुभ माना जाता है।
