चैत्र नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि: मन, वाणी और कर्म की शुद्धि का पवन पर्व

हिंदू पंचांग के अनुसार 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि और चैत्र अमावस्या दोनों ही हैं। आज ही के दिन हिंदू नववर्ष भी मनाया जाएगा जो कि विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है जैसे कि गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र में, उगादी दक्षिण भारत में और सिंधी समाज में इसे चेटी चंद कहा जाता है।

नवरात्रि का अर्थ है- नौ राते जिसमे शक्ति की उपासना की जाती है।

यह दिव्य शक्ति को समर्पित एक पर्व है। इन दिनों भक्त माता के नौ स्वरूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, सकंदमाता, कात्यानी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माता के स्वरूपों की विधि अनुसार पूजा करते हैं। यह समय भक्ति, साधना,उपवास और आत्मशुद्धि का समय होता है।

व्रत के दौरान किन बातों से करे परहेज:

श्रीमद् भगवद्गीता के अनुसार हमे केवल सात्विक भोजन करना चाहिए व तामसिक भोजन का सेवन त्याग देना चाहिए नवरात्रि के समय हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

क्रोध, विवाद झूठ व अपशब्द से बचें क्योंकि इस समय किसी भी नकारात्मक शक्ति का होना अशुभ माना जाता है।

बाल व नाखून ना काटे: देवी भागवत के अनुसार इस समय सकारात्मक ऊर्जा में कोई रुकावट ना आए इसलिए बाल व नाखून काटने को मना किया गया है।

साफ़ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें रोज सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करके ही व्रत का संकल्प करे उसके पश्चात पूजा पाठ करें।

यह समय प्रकृति के पुनर्जागरण, वसंत ऋतु के आगमन और कृषि चक्र में नई फसल आने का प्रतीक है।

जैसे प्रकृति इस समय स्वयं को नया रूप देती है वैसे ही नवरात्रि के इस पावन अवसर पर हमे ख़ुद को सकारात्मकता से परिपूर्ण करना है ,आत्मध्यान से आत्मशुद्धि करनी है, और साधना से अपने जीवन को सार्थक बनाना है।

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