छठी मईया का महापर्व सकुशल संपन्न

उपासना डेस्क, प्रयागराज: चार दिवसीय छठ महापर्व का सकुशल संपन्न हो गया। संगम के किला घाट के पूरब छोर पर सूर्यदेव अपनी लालिमा दिखानी की तैयारी में थे। बादल और धुंध के बीच से छनकर सूर्य की किरणें गंगा-यमुना की लहरों पर तैर रही थीं। जैसे-जैसे सूर्य उदय हो रहे थे, अर्घ्य देने के लिए हजारों व्रती जनों की आस्था और उत्सकुता बढ़ती जा रही थीं।

जब भगवान भाष्कर उदय होने को हुए। घाट पर सूर्यदेव और छठ मइया की जयकार के साथ अर्घ्य-पूजन प्रारंभ हो गया। कलश व प्रसाद लेकर जल में खड़ी व्रती महिलाओं ने सूर्य की अंतिम किरण तक अर्घ्य देकर पुत्र, परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। महिलाओं ने एक दूसरे की नाक से माथे तक सिंदूर भरकर सदा सुहागिन रहने की प्रार्थना की।पूजन, प्रसाद से सुवासित हुआ घाट पूजन से पूर्व व्रती महिलाओं ने विधिविधान से वेदी सजाकर छठ मइया का प्रसाद चढ़ाया।

मनौती के अनुरूप गंगा-यमुना के निमित्त दीपदान कर मंगल कामना की। पूजा की वेदी पर अर्पित प्रकृति फल के प्रसाद की खुशबू से घाट सुवासित हो उठे। घर से घाट तक गूंजते छठ के पारंपरिक गीत ‘हे सूरज देव मंशा पुरवा न हमार…मारबउ रे सुगवा धनुख से.. चलय छठी माई के घाट.. कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय… दग-दग पिया के पियरिया हो सुहावन लागे…और हमहु अरज देवे हे छठ माई निराली छटा बिखेर रहे थे। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं और पुरुष अखंड ज्योति व प्रसाद लेकर वापस हुए सभी व्रती महिलाओं ने प्रसाद एक दूसरे को दिया।

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