रक्षाबंधन पर इस बार नहीं होगा भद्रा का साया

पं. सोमेश्वर जोशी
Mo. 9907058430

चार साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, कि इस बार रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसके अलावा रक्षाबंधन पर्व पर राजयोग भी बन रहा है। पं. सोमेश्वर जोशी ने बताया कि इस बार खास बात यह है कि इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र भी है। यह नक्षत्र दोपहर 12.35 बजे तक रहेगा। पूर्णिमा कल 6.07 से आज शाम 5.26 तक होने से यह त्योहार पूरे दिन मनाया जाएगा। वहीं इस बार श्रावण पूर्णिमा ग्रहण से मुक्त रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन का त्योहार सौभाग्यशाली रहेगा रक्षाबन्धन बंधन के साथ ही पूर्णिमा व्रत, श्रावणी, संस्कृत दिवस, यजुर्वेदी उपक्रम, हयग्रीव जयंती तथा गायत्री जयंती भी मानयी जाएगी।

राजयोग और अन्य ग्रहों की स्थिति –
ज्योतिर्विद पं. सोमेश्वर जोशी के अनुसार इस साल रक्षाबंधन पर गुरु की पंचम दृष्टि से चंद्रमा पर रहेगी। ये स्थिति राजयोग का फल देने वाली रहेगी। इन दोनों ग्रहों के कारण ये पर्व और खास हो जाएगा। इसके अलावा सूर्य-चंद्रमा की प्रतियुति होना भी शुभ माना गया है। राजयोग में राखी बांधने से बहनों का सौभाग्य बढ़ता है और भाइयों को तरक्की मिलती है। वहीं परिवार में शांति और समृद्धि बढ़ती है।

नहीं रहेगी भद्रा लेकिन राहुकाल में राखी बांधने से बचें –
ज्योतिषाचार्य जोशी का कहना है कि रक्षाबंधन का एक आवश्यक नियम है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। सूर्योदय से पूर्व ही भद्रा समाप्त हो जाने से बहनें दिनभर भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी, लेकिन शाम 5.12 से 6:46 बजे तक राहुकाल होने के कारण इस अवधि में राखी नहीं बांधी जा सकेगी। इस प्रकार दोपहर में राखी बांधने का समय करीब 09.27 घंटे का रहेगा।

यह है श्रेष्ठ चौघड़िया मुहूर्त –

  • सुबह 07:45 से 9:20 बजे तक- चर,
  • सुबह 09:21 से 10.45 तक- लाभ,
  • सुबह 10.45 से दोपहर 12:28 तक- अमृत
  • सुबह 12:03 से दोपहर 12:54 बजे तक- अभिजीत मुहूर्त
  • दोपहर 02:03 से 3:38 बजे तक- शुभ
  • शाम को 06.46 से रात 08:12 बजे शुभ
  • रात्रि को 08:13 से रात 09:37 बजे अमृत
  • रात्रि को 09.38 से 11:03 बजे चर
  • शाम को 05:12 से 06:46 बजे तक राहु काल (अशुभ समय)

अशुभ नहीं पंचक का होना –
धनिष्ठा से रेवती तक पांच नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है, जो कि पांच दिनों तक चलता है। पंचक को लेकर लोगों में यह भ्रांति है कि इसमें कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए। बल्कि इसमें अशुभ काम नहीं करने चाहिए। इसमें शुभ कार्य कर सकते हैं, क्योंकि उनकी पांच बार पुनरावृत्ति होती है।

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