कुम्भ 2019 : रुद्राक्ष बाबा का राम मंदिर संकल्प

उपासना डेस्क प्रयागराज : कुंभ मेले में आए कई संत- महात्मा अपने अनूठे अंदाज़ व ख़ास गेटअप की वजह से श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इन्हीं में एक हैं शिवयोगी मौनी महाराज, आइए जानते हैं इनसे जुड़ी कुद बातें….

-मौनी महाराज को देखने के लिए जुटती है भीड़

  • मौनी महाराज 11 हजार रुद्राक्षों की माला पहनकर जब मेले में निकलते हैं, तो उन्हें देखने वालों की भीड़ लग जाती है।
  • मौनी बाबा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र अमेठी के परमहंस आश्रम के महंत हैं।
  • मौनी बाबा प्रयागराज कुम्भ में 19 फ़रवरी तक करीब ११ लाख दीपक जलाएंगे।
  • राम मंदिर निर्माण के महासंकल्प को ले कर अमेठी के इस संत ने १४ साल मौन साधना की।
  • सिर से कमर तक रुद्राक्ष ही रुद्राक्ष. रुद्राक्ष की एक-दो नहीं, बल्कि तकरीबन पांच सौ मालाएं. कोई माला ग्यारह रुद्राक्ष की तो कोई इक्कीस- इक्यावन और एक सौ आठ रुद्राक्षों की. बाबा के शरीर पर तो रुद्राक्ष ही रहता है. इसके साथ ही करीब सौ माला वह अपने सिर पर भी बांधे रहते हैं. इनमें कई रुद्राक्ष एकमुखी हैं तो कई सोलह मुखी तक. ग्यारह हजार रुद्राक्ष का संकल्प करीब साल भर पहले ही पूरा हो चुका है और वह इक्यावन हजार रुद्राक्ष धारण करने के लक्ष्य पर हैं.
  • सिर्फ यही नहीं बाबा करीब 100 मालाएं अपने सिर पर भी बांधे रहते हैं। जिनमें कई रुद्राक्ष एकमुखी, जबकि कई सोलह मुखी हैं।
  • बाबा का 11 हजार रुद्राक्ष का संकल्प करीब सालभर पहले पूरा हो चुका है और वे 51 हजार रुद्राक्ष धारण करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
  • भेंट में मिले रुद्राक्ष ही पहनते हैं बाबा शिवयोगी मौनी महाराज न तो खरीदे हुए रुद्राक्ष पहनते हैं और न ही किसी से मांगते हैं। वे सिर्फ वही रुद्राक्ष पहनते हैं, जो किसी संत या महापुरुष ने उन्हें भेंट किए हों।
  • मौनी महाराज इन रुद्राक्षों की रोज मंत्र पढ़कर पूजा करते हैं। रुद्राक्ष धारण करने के नियमों का पालन करते हैं।
  • कुछ दिनों पहले नेपाल नरेश ने उन्हें सोलह मुखी रुद्राक्ष और सिर पर मालाओं से ऊपर सजा आधे चांद के आकार का मुकुट भेंट किया था।
  • कुंभ मेलेऐसे बाबा के बारें में बताने जा रहे हैं जो राम मंदिर के लिए रविवार को चक्रवाती परिक्रमा किए।राम मन्दिर के लिए ये 191 बार चक्रवर्ती परिक्रमा कर चुके हैं। चक्रवर्ती परिक्रमा में एक बार में ही लेटकर परिक्रमा स्थल पर पहुंचना होता है। जानकारी के लिए बता दें कि बाबा परमहंस सेवा आश्रम अमेठी से आए है। इन्होंने अपने शिविर में ही 33 हजार रुद्राक्ष से 5 फीट ऊंची शिवलिंग का निर्माण किया है। बाबा खुद 11000 रुद्राक्ष की माला पहने हुए हैं।
  • बाबा देश और विदेश दोनों जगह चक्रवर्ती परिक्रमा कर चुके हैं, नेपाल परिक्रमा के दौरान उन्हें नेपाल राजा की तरफ से रुद्राक्ष उपहार स्वरुप मिला। कई अन्य जगह से मिले रुद्राक्ष को धारण करने एवं जिस जगह दीपदान करतें वहॉ रुद्राक्ष से शिवलिंग का निर्माण करने के कारण इन्हें रुद्राक्ष बाबा के नाम से जाना जाता हैं।
  • 14 वर्षों तक मौन रहनें के कारण यें मौनी बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए, 43 वर्षों से बाबा जी ने अन्न, नमक, मीठा नहीं ग्रहण किये हैं। केवल सब्जी और फल ग्रहण करते हैं।

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