मां दुर्गा की ऐसी दूसरी मूर्ति नहीं होगी पूरे भारत में, समाये है नौ रूप

जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर और दिल्ली से मात्र 90 किमी दूर खुर्जा में श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर को खुर्जा वाली मैया के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर में अष्टधातु की 4.5 टन वजन की 27 खंडों में बनी शक्ति स्वरूपा की मूर्ति है, जिसमें मां के नौ रूप समाहित है।

मां की है विलक्षण मूर्ति
श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर में अष्टधातु की चार टन वनज की 27 खंडों में बनी शक्ति स्वरूपा की मूर्ति है, जिसमें मां के नौ रूप समाहित है। इस अटठारहभुजी मर्ति में श्रद्धालु देवी मां के सभी नौ रूपों के दर्शन करते है। मंदिर के सचिव डा. मोहनलाल का दावा है कि मां दुर्गा कि ऐसी विलक्षण मूर्ति भारत में दूसरी और कहीं नही है।

एक में समाए महामाई के नौ रूप
श्रीनवदूर्गा मन्दिर में आदिशक्ति माँ जगद्म्बा के सभी नौ रूपो का श्रंगार भी हर रोज अलग-अलग होता है। श्रंगार से एक दिन पहले मां की पोशाक की पूजा होती है। इस विग्रह को ‘श्री दुर्गा पंचायत’ का रूप दिया गया है, जिसमें माँ भवानी एक रथ पर कमलासन मुद्रा में विराजमान हैं। उनके दायीं ओर हनुमान जी और बायीं ओर भैरों जी उनकी अगुवाई कर रहे हैं। रथ के शीर्ष पर भगवान शंकर विराजमान हैं तथा रथ के सारथी हैं भगवान श्री गणेश।

परिक्रमा का विशेष महत्व
श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर के चारों ओर एक परिक्रमा मार्ग का भी निर्माण किया गया है। जिसकी 108 परिक्रमाओं की कुल लम्बाई श्री गोर्वधन परिक्रमा मार्ग के बराबर है। कहते हैं कि नवरात्रियों में मन्दिर की 108 परिक्रमा करने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। नवरात्रियों में मन्दिर की 108 परिक्रमा करने का विषेश महत्व भी है।

दो हजार वर्ग में फेला है मंदिर
खुर्जा जीटी रोड स्थित अलीगढ चुगी के निकट करीब दो हजार वर्ग गज में श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर बना हुआ है। भूतल से मन्दिर की ऊँचाई 30 फीट व इसके शिखर की ऊँचाई 60 फीट है। मन्दिर के मुख्य द्वार का निर्माण इस तकनीक से किया गया है कि सड़क से ही माता रानी के मुख्य भवन के दर्शन किये जा सकते हैं। मन्दिर प्रांगण में सभी दीवारों व छत पर दिल्ली व जयपुर के कलाकारों द्वारा शीशे की महीन कारिगरी की गयी है।

एक साल में तैयार हुई थी मूर्ति
श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर में स्थापित मूर्ति लखनऊ के मूर्तिकार सुनील प्रज्जापति समेत दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, मथुरा, बनारस व अलीगढ के करीब 100 से अधिक कलाकारों और मूर्तिकारों के प्रयासों से तैयार हुई थी। इसे बनने में एक वर्ष का समय लगा था।

14 फुट ऊंची और 11 फुट चौडी है मां की मूर्ति
दुर्गा माता की अद्वितीय मूर्ति अष्टधातु से बनी इस अटठारहभुजी मर्ति में श्रद्धालु देवी मां के सभी नौ रूपों के दर्शन करते है। यह मूर्ति 14 फुट ऊंची और 11 फुट चौड़ी मूर्ति में मां दुर्गा कमल के आसन पर विराजमान है। मूर्ति का निर्माण एक पिलर पर टिका है।

देवी मंदिर में विशेष आरती
श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर में सुबह विशेष आरती के बाद मां का दरबार श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। मन्दिर के सचिव डा. मोहनलाल ने बताया कि सुबह पांच बजे की मंगला आरती और मुख्य आरती का मनोकामना पूरी होती है।

अष्टमी पर एक हजार किलो का लगता है भोग
श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर में नवरात्रियों के दिनों में हर रोज 56 भोग लगाये जाते है लेकिन अष्टमी वाले दिन आदिशक्ति माँ जगद्म्बा को एक हजार किलो का हलुआ का भोग लगता है। उसके बाद इस हलुआ को प्रसाद के रूप में मंदिर में आए भक्तों को बांट दिया जाता है मन्दिर के निचले तल मे हनुमान जी की 12 फुट ऊँची मूर्ति व भगवान श्री किशन 12 फुट ऊँची मूर्ति बनी हुई है

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