गोपी शुक्ल का शिवाला, इलाहाबाद

प्रस्तुति: अजामिल
सभी चित्र : अमन विष्णु

यज्ञ तीर्थ प्रयाग शिव उपासना के लिए समस्त देवताओं द्वारा समर्थित भूमि है। यहां शिव अपने विभिन्न में रूपों में कई सौ मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित हैं, इनमें से अनेक शिव सिद्ध पीठ माने जाते हैं। साधु संत महात्मा सभी महादेव के दर्शन के लिए प्रयाग आते हैं। इन्हीं मंदिरों के क्रम में पुराने इलाहाबाद के अहियापुर जिसे आज मालवीय नगर कहा जाता है, मैं भगवान शिव का लगभग 200 बरस पुराना गोपी शुक्ल का शिवाला स्थापित है।

मुगलों और अंग्रेजों के शासनकाल में इस मंदिर का स्वरूप बहुत छोटा सा था बाद में गलियों वाले इस मोहल्ले में आकर बसने वाले हिंदुओं ने गोपी शुक्ल के शिवाजी का निर्माण कराया। यह मंदिर शिव मंदिरों के जो मानक है उसके सभी आधारों को पूर्ण करता है। समय के साथ इस मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगाने वाली नक्काशी को बहुत नुकसान हुआ है, लेकिन इसकी प्राचीन सुंदरता को आज भी शेष अवशेष रूप में देखा जा सकता है। इस मंदिर के सभी एक पुराना कुआं भी है जिसे अब बंद करा दिया गया है।

मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित शिवलिंग भक्तों की पूजा अर्चना से सिद्ध हो चुका है। मालवीय नगर मोहल्ले के लोग तो प्रतिदिन यहां स्थापित शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते ही हैं बाहर से भी लोग महादेव के दर्शन के लिए आते हैं। यह प्राचीन धरोहर रखरखाव के अभाव में नष्ट हो रही है। समाज के लोगों को आगे आकर इस मंदिर की सुरक्षा का पूर्ण प्रबंध करना चाहिए। भक्तों का कहना है कि यह चमत्कारिक मंदिर है सच्चे मन से जो इस मंदिर में आकर महादेव की पूजा अर्चना करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। लड़कियों के विवाह के लिए शिवभक्त यहां विशेष संकल्प करते हैं। अहियापुर का यह शिव मंदिर प्रयाग का गौरव है ।

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