रखरखाव के अभाव में पहचान खोता जा रहा है अयोध्या का प्राचीन श्री चित्रगुप्त मन्दिर

अनिल श्रीवास्तव, उपासना डेस्क: अयोध्या स्थित मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम व मां जानकी का प्रथम संयुक्त आराध्य व आस्था का प्रतीक प्राचीन चित्रगुप्त मन्दिर रख रखाव के अभाव में जर्जर अवस्था मे पहुंच कर अपनी पहचान खोता जा रहा है। जीर्ण शीर्ण अवस्था मे पहुंच चुके इस मंदिर में धर्महरि के चरणों मे आज भी श्रद्धालू सच्चे मन से दर्शन कर मनवांछित फल पाने की प्राचीन अवधारणा के साथ अनिवार्यता से नत मस्तक होते हैं।

वीडियो देखे:  धर्महरि चित्रगुप्त दर्शन के बिन अधूरा अयोध्या दर्शन

सरयू नदी के तट पर स्थित इस चित्रगुप्त मन्दिर के विषय मे ऐसी किवदंती है की मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चंद्र जी ने विवाह के उपरांत सर्वप्रथम सरयू स्नान के बाद भगवन चित्रगुप्त जी की पूजा अर्चना की थी । भगवान चित्रगुप्त जी का मंदिर तुलसी उद्यान ,अयोधया के सामने गली से उतारकर बेतिया मंदिर के बगल मीरा पुर,देरीबीबी अयोध्या जी में स्थित है। इस अति प्राचीन मंदिर की पुनः आधारशिला 990ई ० में यमद्वितीया के दिन रखी गयी थी। महमूद गजनवी के काल में प्रमुख मंदिरो के साथ इस मंदिर को भी तहस -नहस केर दिया था।

सं 1902 में पुनः मंदिर का भाग्य उदय हुआ।उसके बाद धर्म हरि मंदिर में आस्था के सहारे भगवान चित्रगुप्त की महिमा आज भी अपनी महत्ता बिखेरती है।सुदूर क्षेत्र के दर्शनार्थी सरयू स्नान के बाद सभी प्रमुख मंदिरों के दर्शन के साथ इस मंदिर की पूजा अर्चना को अनिवार्य रूप दे अपनी मन्नते मांगते नजर आते हैं। आरजू पूरी होने के बाद पूरी श्रद्धा से पुनः भगवान चित्रगुप्त मंदिर में नत मस्तक होकर अपने अपने क्षेत्रों में धर्महरि की महिमा मंडन करते नही थकते।

विडम्बना यह है कि मंदिर शासन प्रशासन की उपेक्षा का शिकार होकर रखरखाव के अभाव में जीर्ण शीर्ण अवस्था मे पहुंच गया है।अयोध्या जैसी धार्मिक नगरी में आस्था के बूते अब तक अपनी पहचान बनाये रखे इस चित्रगुप्त मन्दिर की अब तक किसी सरकार ने सुध नही ली।

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