नहीं खरीद सकते हैं हीरा! तो शुक्र ग्रह को अनुकूल बनाने के लिए पहनें ये उपरत्न

आपने सुना होगा, हीरा है सदा के लिए। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हीरा एक स्थाई रत्न है। इसीलिए यह बहुमूल्य है। यह इसलिए भी कीमती है क्योंकि यह बहुत कम और बड़ी मुश्किल से प्राप्त होता है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इसे धारण करने वाला जातक शीघ्र ही परम धनी और ऐश्वर्यवान हो जाता है।

हीरा के स्थान पर पहनें ये उपरत्न

लेकिन जो जातक अमीर नहीं हैं, वे क्या करें? वैदिक ज्योतिष के मनीषियों ने इसके कई विकल्प और उपाय सुझाएं हैं। जो जातक हीरा खरीदने में असमर्थ हैं, उन्हें इसके स्थान पर ये उपरत्न धारण करने चाहिए:

संग दतला: यह उपरत्न हिमालयी नदियों घाटियों, बर्मा और सिन्धु नदी और में पाया जाता है। यह श्वेत (सफ़ेद), हल्का, चिकना और स्निग्ध आभा से युक्त होता है।

संग कांसला: यह श्वेत और हल्के लाल या गुलाबी रंग का अत्यंत स्निग्ध (चिकना) कीमती पत्थर है। पानी के जैसा चमकदार यह उपरत्न सोन, ब्रहमपुत्र, गंगा और सिन्धु नदियों में प्राप्त होता है। यह नेपाल में भी मिलता है।

संग तुरमली: कावेरी, गंगा नदी और कामरूप, विंध्याचल, हिमालय और श्रीलंका में पाया जानेवाला यह अर्ध-कीमती पत्थर सफ़ेद, गुलाबी और पीले रंग का होता है।

संग सिमाक: हल्का लाल, गुलाबीपन और हरियाली लिए इस उपरत्न में श्वेत और श्याम धब्बे होते हैं। यह भी हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है।

संग कुरज: यह उपरत्न सोने और चांदी-सा चमकीला, सफ़ेद और गुलाबी मिश्रित हल्का धूसर होता है। यह विंध्य और हिमालय में बहुतायत से मिलता है।

जरकन: यह उपरत्न हीरे का प्रतिरूप माना जाता है। श्वेत जरकन हीरे-सा ही फल देता है।

फिरोजा: अनेक ज्योतिष फिरोजा को शुक्र ग्रह का उपरत्न मानते हैं। इसे धारण करने से रिश्तों में मजबूती और प्रेम का संचार होता है। भविष्य में आने वाले संकटों से भी बचने के लिए भी यह धारण किया जाता है।

ओपल: यह शुक्र ग्रह का लोकप्रिय उपरत्न है। इसे धारण करने जातक मानसिक तनाव, उदासीनता, आलस्य और लाल रक्त कणिकाओं से संबंधित विकारों से राहत प्राप्त करता है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हीरा के स्थान पर ऊपर बताए गए उपरत्नों और अर्ध-कीमती पत्थरों को पहनने से हीरा पहनने के समान ही शुभ परिणाम प्राप्त होता है, इसमें कोई संदेह नहीं करें।

शुभमस्तु!

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